Saturday, November 20, 2010

पा लिया एक ख्वाब तो, उम्मीद बढ़ गयी
    जाने ये उम्मीद हमें अब, ले कहाँ जाए
ना- इंसाफी है ये कैसी, कैसा ये सितम
    गुनाह किसी और का, सज़ा कोई पाए
ना आँखों से, ना बातों से, ना लिख कर केह सके
    तो कैसे इस दिल का हम, हाल सुनाये
कसमो पर कभी यकीं, हमें आया ही नहीं
    क्यों फिर कसम खाके, तुझे यकीं दिलाएं
धुल ज़रा ज़रा कभी, हटाते रहना
     यादों के किसी ढेर में , कहीं हम ना खो जाए  

9 comments:

  1. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति|

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  2. bahut hi achchha likha hai. satat blog lekhan ke liye shubkamnayen.

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  3. ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

    संस्‍कृत की सेवा में हमारा साथ देने के लिये आप सादर आमंत्रित हैं,
    संस्‍कृतम्-भारतस्‍य जीवनम् पर आकर हमारा मार्गदर्शन करें व अपने
    सुझाव दें, और अगर हमारा प्रयास पसंद आये तो हमारे फालोअर बनकर संस्‍कृत के
    प्रसार में अपना योगदान दें ।

    यदि आप संस्‍कृत में लिख सकते हैं तो आपको इस ब्‍लाग पर लेखन के लिये आमन्त्रित किया जा रहा है ।

    हमें ईमेल से संपर्क करें pandey.aaanand@gmail.com पर अपना नाम व पूरा परिचय)

    धन्‍यवाद

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  4. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

    कृपया अपने ब्लॉग पर से वर्ड वैरिफ़िकेशन हटा देवे इससे टिप्पणी करने में दिक्कत और परेशानी होती है।

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  5. कसमो पर कभी यकीं, हमें आया ही नहीं
    क्यों फिर कसम खाके, तुझे यकीं दिलाएं

    धुल ज़रा ज़रा कभी, हटाते रहना
    यादों के किसी ढेर में , कहीं हम ना खो जाए

    लाजवाब

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  6. शुरुआत से ही इतने सुन्दर भाव, दिल को छु गए .... बहुत खूब
    यहाँ पर भी पधारे और कमेन्ट दे http://unbeatableajay.blogspot.com/

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  7. इस नए सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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